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विधा/विषय " - गीत"

मेरा गाँव - समुन्द्र सिंह पंवार
  सृजन तिथि : दिसम्बर, 2019
मेरा गाँव है पावन धाम। बार-बार मैं करूँ प्रणाम।। पेड़-पौधों से घिरा हुआ है, धन-धान्य से भरा हुआ है, सुख-सुविधा यहाँ त
ना माँ से बढ़के है जग में कोई - समुन्द्र सिंह पंवार
  सृजन तिथि : जुलाई, 2000
ना माँ से बढ़के है जग में कोई। सेवा कर दिल से जगे क़िस्मत सोई।। तेरे लिए कष्ट उठाती है माँ, तुझे दुनिया में लाती है मा
सावन आया - अमीर ख़ुसरो
  सृजन तिथि :
बेटी तेरा बावा बुट्टा री—के सावन आया। अम्मा मेरे भाई को भेजो जी—के सावन आया। बेटी तेरा भाई तो बालारी—के सावन आया
मातु यश गाऊँ मैं - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 10 मई, 2020
माँ हो तुम ममता का आँचल, माँ बैठ सदा सुख पाऊँ मैं। अश्रुपूरित भींगे नयनों से, तुझे नमन पुष्प चढ़ाऊँ मैं। तू जननी अन
मकर संक्रान्ति - सुषमा दीक्षित शुक्ला
  सृजन तिथि : 13 जनवरी, 2021
मकर संक्रान्ति आज फिर से है आई, लोहड़ी व पोंगल की लख-लख बधाई। एकता का मधुर ये है संदेश लाई, जो रसोई घरों में है खिचड़ी
जय जवान, जय किसान - समुन्द्र सिंह पंवार
  सृजन तिथि : दिसम्बर, 2020
भारत माँ के पूत महान, जय हो जवान और किसान। एक देश की रक्षा करता, एक पेट देश का भरता। इनसे ज़िंदा है हिंदुस्तान, जय हो
करियो नारी का सत्कार - समुन्द्र सिंह पंवार
  सृजन तिथि : फ़रवरी, 2021
करियो नारी का सत्कार, है ये नारी सृजन हार। है ये नारी जग की जननी, इस बिन सृष्टि नहीं चलनी। इस बिन सूना है संसार, करि
ज़िंदगी - समुन्द्र सिंह पंवार
  सृजन तिथि : फ़रवरी, 2021
कभी प्यार, कभी जंग है ज़िंदगी, कभी हसीन कभी बेरंग है ज़िंदगी। बड़ी मुश्किल से मिलती है ये तो, पल-पल रंग बदलती है ये तो।
हम हिन्द के वीर जवान - समुन्द्र सिंह पंवार
  सृजन तिथि : जून, 2021
हम हिन्द के वीर जवान, हमारा क्या कहना। नहीं कोई हमारे समान, हमारा क्या कहना।। नहीं किसी से डरते हैं हम, सदा आगे को ब
रचना विधना - अजय कुमार 'अजेय'
  सृजन तिथि : 24 नवम्बर, 2021
देख तिहारी प्यारी दुनियाँ, मन ही मन हर्षाऊँ मैं। मन बगिया की कली बनूँ, लहर-लहर लहराऊँ मैं। सौंधी माटी महक रही है, क
निशिभर नींद नहीं आई - संजय राजभर 'समित'
  सृजन तिथि : 2 जनवरी, 2022
पूर्वी बयार था मतवाला, छाई तन में अँगड़ाई। याद सताती रही तुम्हारी, निशिभर नींद नहीं आई। देख मुझको आधी रात में, ना
अतीत की विदाई और स्वागत नव वर्ष - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 1 जनवरी, 2022
करें विदाई इक्कीस अतीत, जो कोरोना काल बना हो। स्वागत आगत नववर्ष लसित, सुखद प्रगति उल्लास नया हो। आओ नया साल मनाए
हैप्पी न्यू ईयर टू थाउजन ट्वेंटी - सुषमा दीक्षित शुक्ला
  सृजन तिथि : 25 दिसम्बर, 2021
टू थाउजन ट्वेंटी टू, टू थाउजन ट्वेंटी टू। हैप्पी हैप्पी ईयर न्यू हैप्पी हैप्पी ईयर न्यू 2 बस ख़ुशबू ही ख़ुशबू बिखर
नव वर्ष दो हज़ार बाइस - सुषमा दीक्षित शुक्ला
  सृजन तिथि : 31 दिसम्बर, 2021
दो हज़ार बाइस तुम आओ, जग में नूतन ख़ुशियाँ लाकर। परम पिता की सदा दुआ हो, जग की सुंदर बगिया पर। दो ख़ुशियों की शुभ सौग़ा
नव वर्ष - अभिनव मिश्र 'अदम्य'
  सृजन तिथि : 29 दिसम्बर, 2021
तुम कहते हो! नया साल? पर नए साल सी बात नहीं है। प्राकृति सौन्दर्य सुवासित से, ये धरा सुसज्जित नही हुई। न कुसुम कहीं
ओ सनम - सुषमा दीक्षित शुक्ला
  सृजन तिथि : 11 जुलाई, 2021
ओ सनम ओ सनम ओ सनम ओ सनम, तू ही दिल मे समाया सनम ओ सनम। तुझमे पाया ख़ुदाया सनम ओ सनम, आज जी भर जिया हूँ मैं सौ-सौ जनम। ओ सन
इंसान नहीं हम पंछी हैं - सुषमा दीक्षित शुक्ला
  सृजन तिथि : 2 जनवरी, 2020
इंसान नहीं हम पंछी हैं, हम ताल-मेल कर लेते हैं। 2 है कौन सिखाता ज्ञान हमें, पर मेल-जोल कर लेते हैं। 2 मिलजुल कर हम सब र
तुम बिन कौन उबारे - सुषमा दीक्षित शुक्ला
  सृजन तिथि : 5 अगस्त, 2019
हे कान्हा हे मोहन मेरे, तुम बिन कौन उबारे। मेरे मोहन मेरे कृष्णा तुम ही एक सहारे। 2 इस धरती पर आकर कान्हा तुम भी तो र
अरुणिम उषा है खिली-खिली - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 28 नवम्बर, 2021
पंखुड़ियों में सिमटी कलियाँ, अरुणिमा उषा है खिली-खिली। मुस्कान सुरभि यौवनागमन, मधुपर्क मधुर नव प्रीति मिली। श्
विजय दिवस - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 16 दिसम्बर, 2021
अरुणाभ शौर्य बलिदान वीर, वतन विजय गीत मैं गाता हूँ। जो भारत सीमा निशिवासर, कर नमन हृदय मददाता हूँ। कोख भारती पुल
तुम करो राम से प्यार - अजय कुमार 'अजेय'
  सृजन तिथि : 5 अगस्त, 2020
तुम करो राम से प्यार अमरत बरसेगा। तेरा हो जाए कल्यान अमरत बरसेगा। सूर्यकुल दशरथ के नंदन, माता कौशल्या अभिनंद
आओ जोड़ें दिल तार सखी - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 6 मई, 2020
दुर्गम दुखदाई राह बहुत, अतिजोरों से है हवा चली, घनघोर घटा छाई अम्बर, विकराल जलद सौन्दर्य घड़ी। है कठिन मार्ग विस्
मेरे हमराज़ हो तुम - पारो शैवलिनी
  सृजन तिथि : 12 नवम्बर, 2021
हमसफ़र हमनसीं हमदम मेरे हमराज़ हो तुम मेरी साँसों में बसी मेरी ही आवाज़ हो तुम। तेरे ही दम से है बहार मेरी ज़िंदगी म
भज रे मन बस प्रभु चरण - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 4 मई, 2020
भजो रे मन बस प्रभु चरण, तज तन धन संसार को। पलभर का जीवन दुर्लभ यह, जग अर्पण कर परमार्थ को। भजो रे मन श्रीराम शरण नित,
लाल दुलारे - सुषमा दीक्षित शुक्ला
  सृजन तिथि : 5 जुलाई, 2020
वो मेरे नयनों के तारे, जो मेरे दो लाल दुलारे। वो ग़ुरूर हैं अपनी माँ के, पापा के वो राज दुलारे। एक अगर है सूरज जैसा, द
परी लगे भैया को बहना - सुषमा दीक्षित शुक्ला
  सृजन तिथि : 3 जुलाई, 2021
इस दुनिया में है सबसे प्यारा, भाई बहन का रिश्ता। परी लगे भैया को बहना, भैया लगे फ़रिश्ता। 2 इसमें न कोई ख़ुदग़र्ज़ी है,
आशादीप - सुषमा दीक्षित शुक्ला
  सृजन तिथि : 10 जनवरी, 2020
आओ आशा दीप जलाएँ अंधकार का नाम मिटाएँ। 2 रूह जलाकर ज़िंदा रहना, जीवन की तो रीत नहीं। अंतिम हद तक आस न खोना, मानव मन की
गुनगुनी धूप - सुषमा दीक्षित शुक्ला
  सृजन तिथि : 1 नवम्बर, 2020
गुनगुनी धूप अब मन को भाने लगी, फिर से पीहर में गोरी लजाने लगी। 2 अब सुहानी लगे सर्द की दुपहरी, मौसमी मयकशी है ये जादू
जीवन-धारा - सुषमा दीक्षित शुक्ला
  सृजन तिथि : 10 जनवरी, 2019
तू बिखर गई जीवन-धारा हम फिर से तुझे समेट चले। हम फिर से... 2 मैं रोई थी घबड़ाई थी, उठ-उठ कर फिर गिर जाती थी। तू नागिन जैस
देश हमारा - सीमा 'वर्णिका'
  सृजन तिथि : 24 जून, 2021
विश्व बंधुत्व का राग छिड़ेगा, राष्ट्र प्रगति के सोपान चढ़ेगा। विश्वविजेता हो देश हमारा, सुंदर स्वच्छ यह परिवेश

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