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नवगीत

मधुऋतु में लुटा रहा प्यार - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2020
पुष्पों का ऋतु से अभिसार हो रहा। आज कई रंगों मे खिले कचनार। है ढाक मधुऋतु में लुटा रहा प्यार।। बगीचा- फूल का ब
लगे चटोरे दिन - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2020
मैंने देखा मैंने पाया लगे चटोरे दिन। रबड़ी सी धूप लगती कलाकंद सी छाँव। है शहर की सरहद में उकड़ू बैठा गाँव।। दुर
कटी-कटी है - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2020
एक है माँ कितने बेटों के बीच बँटी है। पिता गए तो सारा घर ही टूट गया है। बुरा समय ख़ुशियों को आकर कूट गया है।। थी म
धुँधलके में - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2020
धूप की चादर बिछी हुई है दिन के पलके में। झूम-झूम के पावस बिल्कुल न बरसा। ताल-झरना-खेत लगा जल को तरसा।। कोई रात के
होने लगी झमाझम बारिश - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 20 फ़रवरी, 2022
होने लगी झमाझम बारिश नदी है उफान पर। बिजली कड़क रही है बादल काले-काले हैं। कुछ नहीं है खंडहर में, मकड़ी के जाले है
मछली बोली जल ही जीवन - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : मार्च, 2022
मछली बोली जल ही जीवन समझें औ समझाएँ। हो रहा जल का दुरुपयोग था अकूत भंडार। सपने सेना उज्जवल भविष्य के है बेकार।।
ऋतुएँ बदल रहीं हैं - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 15 अप्रैल, 2022
हवाओं के मुख से लपटें निकल रहीं हैं। किनारों से दूर नदी सूखकर- काँटा हुई है। जलती धूप पत्तों के गाल पर- चाँटा हुई
राम चरित निराला - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 10 अप्रैल, 2022
दुनिया में लगा है राम चरित निराला। भ्रात प्रेम के अलावा पितृ भक्ति है। जानकी-सीता आलौकिक शक्ति है।। द्वापर में
प्यास वाले दिन - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 7 अप्रैल, 2022
लगे सताने झोपड़ियों को भूख औ प्यास वाले दिन। धूप है दिवस को कचोटने लगी। जब-तब लू हवा को टोंकने लगी।। जीवन में जब
हिंदी सुघड़ सलोनी है - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2019
हिंदी सुघड़ सलोनी है! इसमें लालित्य भरा! मीठा साहित्य भरा! हिंदी हुई मघोनी है! है संस्कृति का गहना! निर्झरिणी
वासंती गहने - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2019
अमराई ने पहने वासंती गहने। महुआरी ले रही बलैयाँ। चम्पा सी महकी हैं छैयाँ। पुरवाई बार बार दे रही उलहने। टेसु श
होली के सातों रंग जीवन में बिखर जाएँ - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 17 मार्च, 2022
हैं टेसू, सेमल और आम निखर-निखर जाएँ। डूब गया ख़ुद में तन्हा है महानगर। लोगों की पीड़ा की मिलती नहीं ख़बर।। होली के
झूठे हैं सब लोग यहाँ - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 13 मार्च, 2022
झूठे हैं सब लोग यहाँ दुनिया भी ये झूठी है। मछली सागर की अभी गहराई नाप रही। हाईवे को देखकर पगडंडी काँप रही।। पहनी
मैं अभी तक भी नदी हूँ - कुँअर बेचैन
  सृजन तिथि :
मैं अभी तक भी नदी हूँ धूप ने मुझको जलाया धूल फेंकी आँधियों ने कूल ने आँखें तरेरीं आग दी भरकर दियों ने चीर, खिंचक
ये भरी आँखें तुम्हारी - कुँअर बेचैन
  सृजन तिथि :
जागती हैं रात भर क्यों ये भरी आँखें तुम्हारी! क्या कहीं दिन में तड़पता स्वप्न देखा सुई जैसी चुभ गई क्या हस्त-र
स्वागतम् ऋतुराज का - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2019
ठंड की ऋतु का अवसान हो गया। सर्द हवा, कुहरा है। जाड़ा तो दुहरा है।। बस कुछ दिन का मेहमान हो गया। स्वागतम् ऋतुरा
महाविनाश - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 8 मार्च, 2022
उस देश के माथे पर है लिखा हुआ महाविनाश। बम-मिसाइलों से भू-भाग उठा थर्रा। मृतप्राय हुआ जमीन का जर्रा-जर्रा।। समय
भोर हुई - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2019
पूरब में दिनकर मुस्काया, भोर हुई! आँगन में गौरइया चहकी! चलती हुई हवा है महकी!! खेतों ने हल गले लगाया, भोर हुई! पग
रंगों में डूब गई होली - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2019
रंगों में डूब गई होली! हवाओं में उड़ रहा गुलाल! रंगोत्सव में धुलता मलाल!! नशीली-नशीली है बोली! फूले टेसू फूले कन
पुलवामा के शहीद - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2019
पुलवामा के शहीद थे देश की आँख के तारे! चमनबंदी, पल्लवन है लगन! आँसू करते हैं शत शत नमन!! सिर पर कफ़न हमेशा बाँधे लगत
फगुनाई ठौर है - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2019
फागुन के रंगों में एक रंग और है! रंग है मधुमास का! हताशा में आस का!! उड़ती हवाइयों में, रंग है परिहास का!! गंध का हि
फूलते पलाश - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2019
फूलते पलाश! चैती हवा! अक्षत जवा!! हर्षित आकाश! पकते बेर! फ़सलें हेर!! चमकता उजास! झूमते वन! उमंगी तन!! अंकुरित हु
जीवन आपाधापी है - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2019
जीवन आपाधापी है! अलापेंगे अपनी राग! हुई व्यर्थ की दौड़ भाग!! वैभवशाली पापी है! चुप अख़बारों की सुर्खी! ख़ुशियों क
बाहर कदमों की आहट - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2019
बाहर कदमों की आहट! खुला जंगला भोर हुई! प्रेयस् हुआ हिलोर हुई!! कुत्तों की है गुर्राहट! किरण दरीचे से झाँके! धूप
पराए दुख दर्द भी संलग्न हो गए - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2019
पराए दुख दर्द भी संलग्न हो गए। कष्टों ने तिनके से घोंसला बनाया। पीड़ा का एक शहर, कोलाहल छाया।। आदमकद आईने तक भग
नदी है उफान पर - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 20 फ़रवरी, 2022
होने लगी झमाझम बारिश नदी है उफान पर। बिजली कड़क रही है बादल काले-काले हैं। कुछ नहीं है खंडहर में, मकड़ी के जाले है
मौसम रंगीन हो गया - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2019
सूरज ने धूप से कहा मौसम रंगीन हो गया। अब चलने लगी हैं चुलबुली हवाएँ। आपस में पेड़ जाने क्या बतियाएँ।। मधुप जो ह
कालिख अँधेरों की - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 12 फ़रवरी, 2022
चेहरे पर रातों के कालिख अँधेरों की। आँगन में उतरे हैं धूप के पखेरू। उम्र ढली उड़ जाते रूप के पखेरू।। आई याद मेड़
उम्मीद पर करने लगी संवेदना हस्ताक्षर - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2019
उम्मीद पर करने लगी संवेदना हस्ताक्षर। हैं ख़्वाब आँखों के पखेरू हो गए। विश्वास के पर्वत सुमेरू हो गए।। आशा अँगू
फलीभूत होती आशाएँ - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2019
कृष्ण पक्ष का, शुक्ल पक्ष है। फलीभूत होती आशाएँ। निष्फल होती हैं कुंठाएँ।। खुला झरोखा, वही कक्ष है। भाग्य हुआ

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