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विधा/विषय " - नज़्म"

अपनी भी दीवाली होती - रोहित गुस्ताख़
  सृजन तिथि : 4 नवम्बर, 2021
होता तेरे चेहरे का नूर, रात न फिर ये काली होती। जश्न मनाते साथ तुम्हारे, अपनी भी दीवाली होती। बैठे हैं हम मन को मार
तेरे बिना - कर्मवीर सिरोवा
  सृजन तिथि : मार्च, 2021
तेरे बिना रो पड़ता हूँ तुझे राज़ी करने के लिए, तेरे बिना जीवन मानिंद जहन्नुम हैं। तू नहीं तो जीवन का हर सुख दुःख हैं।
मुकम्मल जहान हैं - कर्मवीर सिरोवा
  सृजन तिथि : 27 फ़रवरी, 2019
मेहमाँ तिरे आने से जीवन में आया मिठास हैं, ये शादी का लड्डू जीवन में लाया उल्लास हैं। कहते हैं ये लड्डू जो खाए वो पछ
मौत का तांडव - सुषमा दीक्षित शुक्ला
  सृजन तिथि : 1 अप्रैल, 2020
दिख रहा मौत का कैसा तांडव, हाय ये किसने क़यामत ढाया। बेबसी क्यूँ कर दी कुदरत तूने, हाय कैसा ये कैसा क़हर छाया। मौत क
कर्मवीर मास्टर - कर्मवीर सिरोवा
  सृजन तिथि : 15 जनवरी, 2020
मिरी मसर्रतों से गुफ़्तगू कर ज़ीस्त ने कुछ यूँ फ़रमाया हैं, ज्ञानमन्दिर में आकर हयात ने हयात को गले लगाया हैं। सोहबत
मोगरे का फूल - कर्मवीर सिरोवा
  सृजन तिथि : 28 अप्रैल, 2021
चश्म-ओ-गोश के तट पे चिड़िया चहचहाने आई, रिज़्क़ लाज़िम हैं, उठ ना, बख़्त कहता है। अब तक ना सजी मिरी सुब्ह-ओ-जीस्त, बग़ैर ति
मेरा मुस्तक़बिल नज़र आता हैं - कर्मवीर सिरोवा
  सृजन तिथि : 2021
सुनकर ये मधुर धक-धक की आवाज़ ये सच मन में जागा है, हो न हो दिल रुपी सरिता में तेरे नाम का कंकड़ तसव्वुर ने फेंका है। तुम

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