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विधा/विषय " - व्यंग्य कविता"

व्यथा - अजय कुमार 'अजेय'
  सृजन तिथि : 12 नवम्बर, 2015
रसोई घर मे चल रहा, दाल-प्याज संवाद, प्याज ने पूछा कहो दाल बहन! क्या हाल? सुना है कि तुम वी॰वी॰आई॰ई॰ हो गई हो, आम आदमी क
संविधान दिवस - सुधीर श्रीवास्तव
  सृजन तिथि : 26 नवम्बर, 2021
आइए! मौका भी है दस्तूर भी है हमारे मन भरा फ़ितूर जो है, आज भी हम संविधान संविधान खेलते हैं, जब रोज़ ही हम पूरी ईमानदार
मेरी प्रिय - समय सिंह जौल
  सृजन तिथि : 2021
तुझको ना देखूँ तो मन घबराता है, तुझ से बातें करके दिल बहल जाता है। मेरा खाना पानी भूल जाना, तुझे भूखी देखकर तुरंत खा

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