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विधा/विषय " - क्षणिका"

गौं - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2019
हमनें सोचा था निकलेगा गौं! लेकिन बोया गेहूँ उपजा जौ!!
खोज - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2019
हमारा देश समस्याओं का देश है और मैने नई समस्या खोजी है! यह हमारे लिए फ़ीरोज़ी है!!
सरकारी काम - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2019
देश में बदकारी देखकर उनकी आँख हो गई सजल! वे सरकारी काम सरकारी तौर पर कर देते हैं ये है उनका फ़ज़ल!!
शासन व्यवस्था - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2019
कर्मचारी मंडल आचरण से कृष्ण नहीं कंस हो गया है! इसीलिए बदशऊर शासन व्यवस्था का भ्रंश हो गया है!!
नकेल - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2019
रोज़-ब-रोज़ हम बदअमली रहे हैं झेल! रफ़्ता-रफ़्ता कोई भ्रष्टाचार पर डाले नकेल!!
खेल - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2019
अलादीन भ्रष्टाचार को समझता रहा खेल! वह तब अवाक् रह गया जब रिश्वत के आगे उसका चिराग़ हो गया फ़ेल!!
जमादार भाया - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2019
वे उलटे छुरे से मूंड़ते हैं क्योंकि उनके रोम-रोम में भ्रष्टाचार है समाया! इसीलिए ऐसे व्यक्ति को कहेंगे बेकारी
गृहस्थी - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2019
एक महिला अधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मचारी पर अकड़ी! तो उसने सीधा सा उत्तर दिया- मैडम! मुझे तो याद है केवल नून-तेल-लकड
छुरी - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2019
नेता जी सफ़ेदपोश हैं! कालेधन के कोश हैं!! उनकी नियत बुरी है! देश के लिए मीठी छुरी है!!
पगड़ी - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2019
उपदा रसवंत नार सी तगड़ी है! दयानत फ़ज़ीलत की पगड़ी है!!
प्याज और लहसुन - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 15 अक्टूबर, 2019
सरकार नें खींचा अर्थव्यवस्था का कैसा ख़ाका। प्याज और लहसुन ने डाला जनता की जेब में डाका।।

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