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दोहा छंद

माँ मेरी है प्रेरणा - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 4 मई, 2022
ममता करुणा हृदय तल, स्नेह सुधा उर पान। माँ जननी धरती समा, तू जीवन वरदान॥ क्षमा दया जीवन कला, तू जीवन सुख छाव। सुख द
पान पुराना घी नया - गंग
  सृजन तिथि :
पान पुराना घी नया, अरु कुलवंती नारि। चौथी पीठि तुरंग की, स्वर्ग निसानी चारि॥
समरस जीवन सहज हो - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 9 अक्टूबर, 2021
अरुणिम आभा भोर की, खिले प्रगति नवयान। पौरुष परहित जन वतन, सुरभित यश मुस्कान॥ नवयौवन नव चिन्तना, नूतन नवल विहान। न
चरण धरत चिंता करत - केशव
  सृजन तिथि :
चरण धरत चिंता करत, नींद न भावत शोर। सुबरण को सोधत फिरत, कवि व्यभिचारी चोर॥
रंगों का त्योहार - विपिन दिलवरिया
  सृजन तिथि : 17 मार्च, 2022
रंग-बिरंगे रंग है, रंगों का त्योहार। घर में लाता है ख़ुशी, होली का त्योहार॥ होली का त्योहार है, रंग प्यार के संग। चल
परिवर्तन जीवन कला - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 26 दिसम्बर, 2021
सबको शुभ प्रातर्नमन, मंगल हो शुभकाम। हर्षित पौरुष जन धरा, भक्ति प्रीति हरि नाम॥ हरित ललित कुसुमित प्रकृति, निर्म
लखि वसन्त कवि कामिनी - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 2021
खिली मंजरी माधवी, प्रमुदित वृक्ष रसाल। हिली डुली कलसी प्रिया, हरित खेत मधुशाल॥ वासन्तिक पिक गान से, मुदित प्रकृत
प्रेम प्रेम सब ही कहत - भारतेंदु हरिश्चंद्र
  सृजन तिथि :
प्रेम प्रेम सब ही कहत, प्रेम न जान्यौ कोय। जो पै जानहि प्रेम तो, मरै जगत क्यों रोय॥
प्रेम सकल श्रुति-सार है - भारतेंदु हरिश्चंद्र
  सृजन तिथि :
प्रेम सकल श्रुति-सार है, प्रेम सकल स्मृति-मूल। प्रेम पुरान-प्रमाण है, कोउ न प्रेम के तूल॥
रैदास सोई सूरा भला - रैदास
  सृजन तिथि :
रैदास सोई सूरा भला, जो लरै धरम के हेत। अंग−अंग कटि भुंइ गिरै, तउ न छाड़ै खेत।।
रैदास हमारौ राम जी - रैदास
  सृजन तिथि :
रैदास हमारौ राम जी, दशरथ करि सुत नाहिं। राम हमउ मांहि रहयो, बिसब कुटंबह माहिं।।
प्रेम पंथ की पालकी - रैदास
  सृजन तिथि :
प्रेम पंथ की पालकी, रैदास बैठियो आय। सांचे सामी मिलन कूं, आनंद कह्यो न जाय।।
ब्राह्मन कोय न होय - रैदास
  सृजन तिथि :
ऊँचे कुल के कारणै, ब्राह्मन कोय न होय। जउ जानहि ब्रह्म आत्मा, रैदास कहि ब्राह्मन सोय।।
जनम जात मत पूछिए - रैदास
  सृजन तिथि :
जनम जात मत पूछिए, का जात अरू पात। रैदास पूत सब प्रभु के, कोए नहिं जात कुजात।।
रैदास प्रेम नहिं छिप सकई - रैदास
  सृजन तिथि :
रैदास प्रेम नहिं छिप सकई, लाख छिपाए कोय।। प्रेम न मुख खोलै कभऊँ, नैन देत हैं रोय।।
मस्जिद सों कुछ घिन नहीं - रैदास
  सृजन तिथि :
मस्जिद सों कुछ घिन नहीं, मंदिर सों नहीं पिआर। दोए मंह अल्लाह राम नहीं, कहै रैदास चमार।।
श्रद्धांजलि: स्वर कोकिला लता मंगेशकर - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 6 फ़रवरी, 2022
अस्ताचल लतिका लता, सुरभि गीत संसार। देशरत्न सुर कोकिला, भवसागर से पार।। प्रीत गीत संगीत की, सामवेद प्रतिरूप। अवत
नवप्रभात नवचेतना - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 18 मई, 2020
सोमदेव की कृपा से, शीतल भाव विचार। उषाकाल की लालिमा, करे सुखद संसार।। श्रवण मनन चिन्तन सदा, मौन बने नित शक्ति। सम
नवभोर - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 17 मई, 2020
सूर्यदेव अनुपम कृपा, मिले सकल संसार। रोगमुक्त सुन्दर धरा, सुखदा पारावार।। भव्या रम्या मनोहरा, श्वेताम्बर जगदम्
सुभाष: भारत माँ का लाड़ला - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 23 जनवरी, 2022
सदा अथक संघर्ष ने, माँ भारत के त्राण। आत्मबल विश्वास दे, कर सुभाष निर्माण।। भारत माँ का लाडला, महावीर सम पार्थ। मे
ख़ुसरो रैन सुहाग की - अमीर ख़ुसरो
  सृजन तिथि :
ख़ुसरो रैन सुहाग की, जागी पी के संग। तन मेरो मन पीउ को, दोउ भए एक रंग।।
नवनीत माला - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 15 मई, 2020
चले गेह नित मातु से, पिता चले परिवार। गुरु गौरव समाज का, चले देश सरकार।। कारण सब हैं नव सृजन, चाहे देश समाज। निर्मा
हो जीवन उजियार - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 12 मई, 2020
मार्ग सुलभ है पाप का, बड़ा भयावह अन्त। दुर्गम राहें धर्म का, सत्य विजय भगवन्त।। कठिन परीक्षा सत्य की, बलि लेती अविर
छँटे रात्रि फिर सबेरा - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 11 मई, 2020
चहल पहल फिर से शुरू, जीवन नया प्रभात। सजी रेल से पटरियाँ, गमनागम सौगात।। फँस जनता जज़्बात में, नतमस्तक सरकार। कोरो
मेरा मुझ में कुछ नहीं - कबीर
  सृजन तिथि :
मेरा मुझ में कुछ नहीं, जो कुछ है सो तेरा। तेरा तुझकौं सौंपता, क्या लागै है मेरा।।
धूल, धुआँ, आँधी चले - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 24 जुलाई, 2020
धूल, धुआँ, आँधी चले, नदी छोड़ती कूल। पावस रही सुधारती, गर्मी की यह भूल।।
बारिश है दुल्हन बनी - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 29 जुलाई, 2020
बारिश है दुल्हन बनी, मेघ रचाते ब्याह। पावस में मिटने लगी, जेठ मास की दाह।।
इस दुनियाँ में झूठ - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 4 अगस्त, 2020
मकड़जाल सा है बुना, इस दुनियाँ में झूठ। मौसम का आघात है, गईं बहारें रूठ।।
सौ-सौ उठे बवाल - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 8 अगस्त, 2020
भावों की संकीर्णता, पैदा करे मलाल। इक छोटी सी बात पर, सौ-सौ उठे बवाल।।
कोहिनूर है आचरण - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 11 अगस्त, 2020
कोहिनूर है आचरण, सोना हुआ स्वभाव। संयम से जीवन चले, सिमट गया बिखराव।।

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