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विधा/विषय " - दोहा छंद"

सुभाष: भारत माँ का लाड़ला - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 23 जनवरी, 2022
सदा अथक संघर्ष ने, माँ भारत के त्राण। आत्मबल विश्वास दे, कर सुभाष निर्माण।। भारत माँ का लाडला, महावीर सम पार्थ। मे
ख़ुसरो रैन सुहाग की - अमीर ख़ुसरो
  सृजन तिथि :
ख़ुसरो रैन सुहाग की, जागी पी के संग। तन मेरो मन पीउ को, दोउ भए एक रंग।।
नवनीत माला - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 15 मई, 2020
चले गेह नित मातु से, पिता चले परिवार। गुरु गौरव समाज का, चले देश सरकार।। कारण सब हैं नव सृजन, चाहे देश समाज। निर्मा
हो जीवन उजियार - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 12 मई, 2020
मार्ग सुलभ है पाप का, बड़ा भयावह अन्त। दुर्गम राहें धर्म का, सत्य विजय भगवन्त।। कठिन परीक्षा सत्य की, बलि लेती अविर
छँटे रात्रि फिर सबेरा - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 11 मई, 2020
चहल पहल फिर से शुरू, जीवन नया प्रभात। सजी रेल से पटरियाँ, गमनागम सौगात।। फँस जनता जज़्बात में, नतमस्तक सरकार। कोरो
मेरा मुझ में कुछ नहीं - कबीर
  सृजन तिथि :
मेरा मुझ में कुछ नहीं, जो कुछ है सो तेरा। तेरा तुझकौं सौंपता, क्या लागै है मेरा।।
धूल, धुआँ, आँधी चले - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 24 जुलाई, 2020
धूल, धुआँ, आँधी चले, नदी छोड़ती कूल। पावस रही सुधारती, गर्मी की यह भूल।।
बारिश है दुल्हन बनी - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 29 जुलाई, 2020
बारिश है दुल्हन बनी, मेघ रचाते ब्याह। पावस में मिटने लगी, जेठ मास की दाह।।
इस दुनियाँ में झूठ - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 4 अगस्त, 2020
मकड़जाल सा है बुना, इस दुनियाँ में झूठ। मौसम का आघात है, गईं बहारें रूठ।।
सौ-सौ उठे बवाल - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 8 अगस्त, 2020
भावों की संकीर्णता, पैदा करे मलाल। इक छोटी सी बात पर, सौ-सौ उठे बवाल।।
कोहिनूर है आचरण - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 11 अगस्त, 2020
कोहिनूर है आचरण, सोना हुआ स्वभाव। संयम से जीवन चले, सिमट गया बिखराव।।
मन मथुरा दिल द्वारिका - कबीर
  सृजन तिथि :
मन मथुरा दिल द्वारिका, काया कासी जाणि। दसवाँ द्वारा देहुरा, तामै जोति पिछांणि।।
माँ - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 10 मई, 2020
जन्मा जिसने कोख से, करा पयोधर पान। ममताँचल में पालकर, साश्रु नैन मुस्कान।। चारु चन्द्रिका शीतला, करुणा पारावार।
श्रद्धांजलि: बिपिन रावत - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 9 दिसम्बर, 2021
सिसक रही माँ भारती, साश्रु वतन संतान। खोकर विपिन सपूत को, अमर शौर्य बलिदान।। आज पार्थ अवसान सुन, शोकाकुल जन देश। श
अनाघ्रात मधु यामिनी - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 8 मई, 2020
मुस्काती सुन्दर अधर, शर्मीली सी नैन। दंत पंक्ति तारक समा, मुग्धा हरती चैन।। मादकता हर भाव में, कर्णफूल अभिराम। सज
बुद्ध पूर्णिमा - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 7 मई, 2020
था मन अशान्ति तज गेह को, निकल पड़ा सिद्धार्थ। बोधवृक्ष नीचे मिला, सत्य शान्ति परमार्थ।। दया धर्म करुणा हृदय, सदाचा
दफ़्तर में होने लगे, बस तिकड़म के खेल - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 14 अगस्त, 2020
दफ़्तर में होने लगे, बस तिकड़म के खेल। अफ़सर ऐसा लग रहा, हो जैसे राफेल।।
रिश्ते अब लगने लगे, कड़वी-कड़वी नीम - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 18 अगस्त, 2020
रिश्ते अब लगने लगे, कड़वी-कड़वी नीम। एक समय में भरा था, इनमें प्यार असीम।।
पानी जैसा रक्त - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 19 अगस्त, 2020
अब हमको चुभने लगा, नागफनी सा वक्त। लगे बहाने लोग हैं, पानी जैसा रक्त।।
मानवता के बीज - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 20 अगस्त, 2020
साहचर्य की भावना, आज हुई नाचीज़। बंजर धरती पर पड़े, मानवता के बीज।।
कालेधन की बात - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 20 अगस्त, 2020
वर्तमान है कर रहा, कालेधन की बात। ऐसे धन ने बेच दी, दुल्हन जैसी प्रात।।
घुटन हो रही देश को - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 13 जनवरी, 2021
घुटन हो रही देश को, दाम बनाए काम। दाँतों में उँगली दबा, बैठा हुआ अवाम।।
बात सुलह की क्या करें - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 14 जनवरी, 2020
बात सुलह की क्या करें, खाए बैठे खार। दंदी-फंदी तत्व से, होता बंटाधार।।
ठंडी का फैलाव - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 18 जनवरी, 2021
मैंने देखा हर जगह, ठंडी का फैलाव। ठिठुर रही इस देह का, साथी बना अलाव।।
चरखा अब चलता नहीं - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 26 जनवरी, 2021
चरखा अब चलता नहीं, खादी होती लुप्त। फ़ैशन ऐसा चल रहा, अंग दिख रहे गुप्त।।
असंतोष पैदा हुआ - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 10 मार्च, 2021
असंतोष पैदा हुआ, अस्थिर होगा देश। राजनीति के नाम से, आता है आवेश।।
फागुन - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 28 मार्च, 2019
फूल, पत्तियाँ, फुनगियाँ, मधुॠतु में मदहोश। पवन झकोरे सुरभि को, लेते हैं आगोश।। फागुन होली से मिले, दे मीठा अहसास। स
मंगलमय सब काम - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 5 मई, 2020
रोम-रोम तनु राममय, भक्त राम हनुमान। भोर भयो सुमिरन करूँ, मंगलमय सब काम।। रोग शोक परिताप सब, मिटे सकल संसार। आंजनेय
राधे बिन गोविन्द कहँ - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 4 मई, 2021
यदुनंदन ऋषिकेश प्रभु, बसे यमुन के तीर। राधा दौड़़ी गल मिली, भरी आँख में नीर।। भव्य मनोहर रूपसी, नीर भरी लखि नैन। कम
मातु-पिता यदि साथ हों - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 3 अगस्त, 2020
मातु-पिता यदि साथ हों, तम में दिखे उजास। ईश्वर तो हैं बाद में, ये हैं दिल के पास।।

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