हसरत जयपुरी | Hasrat Jaipuri

हसरत जयपुरी


3 फिल्मफेयर पुरस्कार- 'बहारों फूल बरसाओ' (सूरज) और 'सबसे बड़ा नादान' (पहचान) गानों के लिए जीते। साहित्यिक सम्मान-उर्दू-हिंदी कविता में योगदान के लिए प्रतिष्ठित जोश मलीहाबादी पुरस्कार मिला। प्रतिष्ठित उपाधियाँ- समाज और कला में योगदान के लिए डॉ. अंबेडकर पुरस्कार और वर्ल्ड यूनिवर्सिटी से मानद डॉक्टरेट मिली।


इक़बाल हुसैन,

हसरत

15 अप्रैल 1922 है।

17 सितम्बर 1999 है

गीतकार (हसरत जयपुरी का मुख्य काम फ़िल्म के लिए गाने लिखना था। वह एक बेहद सफल गीतकार और शायर रहे।)

बारे में


हसरत जयपुरी का असली नाम इकबाल हुसैन था। उनका जन्म पंद्रह अप्रैल उन्नीस सौ बाईस को जयपुर शहर में हुआ था। उन्होंने अपने नाना फिदा हुसैन से उर्दू और फारसी भाषा सीखी। साल उन्नीस सौ चालीस में वह काम की तलाश में मुंबई आए, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एक बस कंडक्टर के रूप में भी काम किया। बाद में राज कपूर ने उनकी शायरी से प्रभावित होकर उन्हें फिल्म बरसात में बड़ा ब्रेक दिया। उन्होंने श्री चार सौ बीस और संगम जैसी प्रसिद्ध फिल्मों के लिए सैकड़ों सुपरहिट गाने लिखे। उन्हें उनके सर्वश्रेष्ठ गीतों के लिए तीन फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिले। सत्रह सितंबर उन्नीस सौ निन्यानबे को मुंबई शहर में इस महान गीतकार का देहांत हुआ।

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