साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
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अलीगढ़, उत्तर प्रदेश
1954
कभी फेफड़े भर जाते हैं गूँगे दुख से दिल का कहीं पता नहीं मिलता भ्रम की पीठ दिखाई देती है चेहरा नहीं।
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