साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3588
कटनी, मध्य प्रदेश
1966
ग्राहक बना जमूरा है बाज़ार मदारी है! इच्छाएँ टँगी हुईं शो केस मे! अब रावण फिरें साधू के भेष मे! हर महीने सिर पर चढ़ती जाए उधारी है! मोल भाव करना भी एक आर्ट है! मकड़जाल हुआ ये मेगामार्ट है! माशा तोला जो होता है वो व्यापारी है!
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