साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3619
कटनी, मध्य प्रदेश
1966
वसुधा के पाप यहाँ धोता है मेह। सड़कें गलियाँ और शिलाएँ हैं। लू से झुलसी हुईं फ़िज़ाएँ हैं।। लगा भिगोने सबको पावस का नेह। वर्षा के जल में तैरती नदी। सावन है नेकी जेठ है बदी।। बारिश ने मानी चौमासे की देह।
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