साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
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नई दिल्ली, दिल्ली
1963
बंजर धरती पर अंकुर क्या फूटा! उपजाऊ भूमि भी तिलमिला उठी। जब जुगनू की छोटी-सी आशा से अंधेरे में रोशनी झिलमिला उठी।
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