कोई
ऐसा भी होता है दर्द?
जिसका
कोई चेहरा न हो
आँख, नाक, कान,
मुख से विहीन!
आत्मा के अँधेरों में
गहरे उतरता
और टपकता साँसों से
रिस-रिसकर।
दर्द का चेहरा
दशानन का तो नहीं।
जिसके दशों आनन
एक-एक कर
तीक्ष्ण वाण से
कर दिए गए
धड़ से अलग?

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