दिल में मेरे कोई, भूचाल-सा ठहर गया,
बस रह गया वो याद में, ख़्याल-सा ठहर गया।
बात कोई आ उठी, कि तीर सी वो है लगी,
ग़ुस्सा उतर गया सिर्फ़, मलाल-सा ठहर गया।
फिर आग सी उठी कोई, सब चूर कर गई,
धुँआ-धुँआ हो गया, जंजाल-सा ठहर गया।
क्यूँ कैसे कब हुआ, मुझको ना पता चला,
मेरे ज़हन में कोई, सवाल-सा ठहर गया।
लब है सिलें सिलें, अरमाँ कुछ दबें दबें,
कुछ भी ना कह सका, निढाल-सा ठहर गया।
बशर वो अब जा चुका, बातें ही बस है बची,
बातों में भी नशा उसका, कमाल-सा ठहर गया।
यूँ तो बहुत-सा कुछ, पा लिया है 'सुराज' ने,
उसके बग़ैर मैं पर, कंगाल-सा ठहर गया।

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