साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3595
कटनी, मध्य प्रदेश
1966
हैं टेसू, सेमल और आम निखर-निखर जाएँ। डूब गया ख़ुद में तन्हा है महानगर। लोगों की पीड़ा की मिलती नहीं ख़बर।। होली के सातों रंग जीवन में बिखर जाएँ। अमराई मधुऋतु की ले रही बलैंया। महक उठी है ख़ुशबू से महुवा की छैंया।। ढह बुराई के अगर गगनचुंबी शिखर जाएँ।
अगली रचना
पिछली रचना
साहित्य और संस्कृति को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता होती है। आपके द्वारा दिया गया छोटा-सा सहयोग भी बड़े बदलाव ला सकता है।
रचनाएँ खोजने के लिए नीचे दी गई बॉक्स में हिन्दी में लिखें और "खोजें" बटन पर क्लिक करें