आसमान आज भी बरस रहा है,
कल पानी बरसा रहा था,
आज आग है।
आसमान भी काला है,
चंद्रमा भी सफ़ेद चादर ओढ़ा होगा,
आज उसमें भी दाग़ है।
धरती का रंग नीला नहीं,
वह रंग कोई हरा रहा होगा।
आज एक घास में भी फ़रियाद है।
शेर भी इंसान के साथ रहता होगा,
उसने भी फलों का स्वाद लिया होगा।
आज वह भी लाशों से आबाद है।

साहित्य और संस्कृति को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता होती है। आपके द्वारा दिया गया छोटा-सा सहयोग भी बड़े बदलाव ला सकता है।
सहयोग कीजिएप्रबंधन 1I.T. एवं Ond TechSol द्वारा
रचनाएँ खोजने के लिए नीचे दी गई बॉक्स में हिन्दी में लिखें और "खोजें" बटन पर क्लिक करें
