बहुधा कवि मर जाते हैं
अच्छे कवि और जल्दी मर जाते हैं
कविताओं के खँडहरों में
उत्खनन करता हुआ
कोई सिरफिरा
खोज लेता है
किसी कवि का कंकाल
उसकी मिट्टी हो चुकी कविता की किताब
वह अक्षरों को पहचानता है
और बुदबुदाता है
अपने हाथों में मिट्टी हो गए
शब्द बार-बार
विक्षिप्त की तरह
बार-बार

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