साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3588
जयपुर, राजस्थान
1952
किसी भी रंग को आप नहीं कह सकते लाल लाल होने के लिए ज़रूरी है उसका लाल होना कविता होने के लिए भी लाल वाली बात सच है।
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