साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3580
पटना, बिहार
1846 - 1927
मज़मूँ मेरे दिल में बे-तलब आते हैं क़ुदसी तबक़-ए-नूर में दबे जाते हैं कुछ और नहीं इल्म मुझे इस के सिवा कहता हूँ वही जो मुझ से कहलवाते हैं
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