साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3615
नई दिल्ली, दिल्ली
1976
मिलेगी एक दिन मंज़िल अभी यह आस बाक़ी है। अजी मक़सद अभी तो ज़िंदगी का ख़ास बाक़ी है।।
अगली रचना
साहित्य और संस्कृति को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता होती है। आपके द्वारा दिया गया छोटा-सा सहयोग भी बड़े बदलाव ला सकता है।
रचनाएँ खोजने के लिए नीचे दी गई बॉक्स में हिन्दी में लिखें और "खोजें" बटन पर क्लिक करें