साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3580
कटनी, मध्य प्रदेश
1966
मुश्किलों में मुस्कुराना सीख ले, और ख्वाबों को सजाना सीख ले। बेशरम है यदि यहाँ पर आदमी, इसलिए तूँ भी लजाना सीख ले। बोरियत होती अगर है शाम से, वायलिन पर धुन बजाना सीख ले। तोहमत जो है लगाई शौर्य पर, आँसुओं का है ख़ज़ाना सीख ले। ज़िंदगी ज़िंदादिली से हम जिएँ, तो चुनौती आजमाना सीख ले।
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