साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3636
कटनी, मध्य प्रदेश
1966
कौतुकी हुई है नदी की कहानी। उद्गम से शुरू फिर चौड़ा है पाट। मिलते हैं रस्ते में नदिया औ घाट।। चूमें है चश्म मौजों की रवानी। काटा है रास्ते में पहाड़ों को। सुख दुख अपना बताती झाड़ों को।। है नदी के किनारे शाम सुहानी।
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