साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3638
जयपुर, राजस्थान
1922 - 1999
कहने को वो हसीन थे आंखें थीं बेवफ़ा दामन मेरी नज़र से बचा कर चले गए जाने क्यों तेज़ हुई जाती है दिल की धड़कन चुटकियां लेती है क्यों सीने में मीठी सी चुभन किस वास्ते लिक्खा है हथेली पे मेरा नाम मैं हर्फ़-ए-ग़लत हूँ तो मिटा क्यूं नहीं देते
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