साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3636
कटनी, मध्य प्रदेश
1966
आड़ा है वक्त वृक्ष को पत्ते भारी लग रहे! पंछी का कलरव दहशत ने लील लिया! ॠतुओं का चक्र हुआ प्रदूषण ने कील लिया! भावनाओं को चीरने वाली आरी लग रहे! खुरपी है, गैंती है और कुदाली है! सन्निपात होने से वक्त सवाली है! उत्सव-उमंग की एवज में अब ख़्वारी लग रहे!
अगली रचना
पिछली रचना
साहित्य और संस्कृति को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता होती है। आपके द्वारा दिया गया छोटा-सा सहयोग भी बड़े बदलाव ला सकता है।
रचनाएँ खोजने के लिए नीचे दी गई बॉक्स में हिन्दी में लिखें और "खोजें" बटन पर क्लिक करें