साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3595
पटना, बिहार
1846 - 1927
तन्हा है चराग़ दूर परवाने हैं अपने थे जो कल आज वो बेगाने हैं बे-रंगी-ए-दुनिया का न पूछो अहवाल क़िस्से हैं कहानियाँ हैं अफ़्साने हैं
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