साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
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बलिया, उत्तर प्रदेश
1961
तुम्हारे साथ जो बरता हुआ है, वो लम्हा जस का तस रक्खा हुआ है। अभी ये रंग जो पहना है तुम ने, यही मौसम ने भी पहना हुआ है। तुम्हारा नाम क्यों पूछेगा कोई, यहाँ हर फूल पे लिक्खा हुआ है।
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