साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3580
बलिया, उत्तर प्रदेश
1961
तुम्हारे साथ जो बरता हुआ है, वो लम्हा जस का तस रक्खा हुआ है। अभी ये रंग जो पहना है तुम ने, यही मौसम ने भी पहना हुआ है। तुम्हारा नाम क्यों पूछेगा कोई, यहाँ हर फूल पे लिक्खा हुआ है।
अगली रचना
साहित्य और संस्कृति को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता होती है। आपके द्वारा दिया गया छोटा-सा सहयोग भी बड़े बदलाव ला सकता है।
रचनाएँ खोजने के लिए नीचे दी गई बॉक्स में हिन्दी में लिखें और "खोजें" बटन पर क्लिक करें