साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3638
इन्दौर, मध्य प्रदेश
1946 - 2009
तुम्हारी हँसी होती तो चुप हो, छिप जाते हवा की ओट में हँसी होती अगर हवा पर रक़्साँ खिल जाते तारामंडलों के चुपचाप गुलाब छिप जाते तुम्हारी ओट में हँसी होती तो चुप्पी होती छिप जाते तारामंडलों की ओट में हवा में गुलाबों की महक रक़्सा होती तुम्हारी हँसी होती तो किस-किसकी हँसी होती हवा की ओट में गुलाब खिलते या मुरझाते हुए
अगली रचना
पिछली रचना
साहित्य और संस्कृति को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता होती है। आपके द्वारा दिया गया छोटा-सा सहयोग भी बड़े बदलाव ला सकता है।
रचनाएँ खोजने के लिए नीचे दी गई बॉक्स में हिन्दी में लिखें और "खोजें" बटन पर क्लिक करें