साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3615
बलिया, उत्तर प्रदेश
1994
तुम्हारा हर दिन का रूठना गंवारा नहीं लगता, मेरा हर दिन का मनाना प्यारा नहीं लगता।
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